पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा – पर्सनल लोन की रिकवरी.

बहुत सारे लोग बैंक से पर्सनल लोन लेते है लेकिन अधिकतर उधारकर्ता के मन में यह प्रश्न रहता है की पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा, पर्सनल लोन की रिकवरी कैसे होती है इस विषय पर हम आपको विस्तृत जानकारी देने वाला हूँ। इन प्रश्नो के लिए बहुत सारे उधारकर्ता के मन में चिंता बनी रहती है अधिक ज्ञान के पूरा लेख पढ़े।

आज के समय में अधिकतर लोग बैंक से या ऋण देने वाली संस्था से ऋण लेते है। ऋण कई प्रकार के होते है जैसे होम लोन, एजुकेशन लोन, कॉर्पोरेट लोन, व्हीकल लोन, के अलावा भी कई प्रकार के लोन होते है। उसीमे काफी पॉपुलर पर्सनल लोन भी आता है। बड़ी संख्या में लोग पर्सनल लोन लेते है। और लोन के मुकाबले पर्सनल लोन लेने में लोगो को आसानी होती है।

पर्सनल लोन आवेदक अपने निजी कामो के लिए लेता है। जैसे ट्रवेल करना, देश दुनिया घूमना, शादी विवाह, पढाई और लिखाई जैसे कामो के लिए अलावा घर के खर्चो को मेन्टेन करना, घर में रेनोवेशन करना, बच्चे की शादी, बच्चे के अन्य खर्चो को मेन्टेन करना। ऐसे कामो को आप पर्सनल लोन से पूरा कर सकते है पर्सनल लोन किसी भी बैंक से आसानी से ले सकते है।

Personal Loan लेने में अधिक भाग दौड़ करने की आवश्यकता नहीं होती है। अधिक दस्तावेज की आवश्यकता भी नहीं होती है। जिस तरह और लोन में काफी ज्यादा डाक्यूमेंट्स की आवश्यकता पड़ती है। ऐसा पर्सनल लोन में नहीं होता है। अगर आपका किसी बैंक में पहले से खाता है तो कम समय में आसानी से पर्सनल लोन प्राप्त कर सकते है। अगर नहीं तो बैंक में खाता खोल सकते है।

पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा?

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जिस तरह पर्सनल लोन लोगो को मिल जाता है, उसी तरह कई लोगो को इन लोन रकम को चुकाने में काफी परेशानी आती है। फिर उधारकर्ता के मन में कई प्रकार के प्रश्न आते है और डर बना रहता है। क्योकि जब हम लोग बैंक से या किसी ऋण देने वाली संस्था से लोन लेते है। तो अपनी सहमति के अनुसार लोन चुकाने का अनुबंध (Agreement) जोकि एक लीगल एग्रीमेंट होता है। उसे भरते है।

अधिकतर उधारकर्ता अपने लोन रकम को समय पर सभी किस्तों को भरकर चूका देते है। लेकिन कई बार ऐसी परस्थिति आ जाती है। जिसके कारण कई व्यक्ति लोन नहीं चूका पाते है तो इस अवस्था में बैंक उधारकर्ता को डिफॉल्टर घोसित करके कानूनी कार्रवाई कर सकता है। अगर उधारकर्ता की एक क़िस्त मिस हो जाती है किसी कारणवश वह एक क़िस्त नहीं भर पाता है। तो उसे डिफॉल्टर नहीं बनाया जायेगा।

जैसे एक से अधिक क़िस्ते आप नहीं भर पाते है। फिर बैंक के डिफॉल्टर के रूप में करवाई कर सकता है। हलाकि कई बैंक और NBFC (Non banking financial company) उधारकर्ता को Repayment के लिए कुछ समय देती है। जिसके बदले में Late Fees भी चार्ज करती है। ऐसे में आप अपने क्रेडिट स्कोर का फिर से सुधार कर सकते है।

समय पर किस्तों को न भरना लोन न चुकाना उधारकर्ता के क्रेडिट स्कोर और सिविल स्कोर को प्रभावित कर सकती है। अगर किसी भी उधारकर्ता को बैंक के द्वारा डिफाल्टर बनाया जाता है तो बैंक उस पर कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। जोकि उसके पास एक Legal Agreement होता है उसी के आधार पर कार्रवाई होगी और उधारकर्ता की परेशानी बढ़ जाएगी।

अगर बैंक के द्वारा आपको डिफाल्टर बनाया भी जाता है जिसमे उधारकर्ता के पास भी कुछ अधिकार होते है जैसे उधारकर्ता के ऊपर दबाव बैंक नहीं बना सकता है परेशान नहीं कर सकता है। यदि कोई भी रिकवरी एजेंट आपके साथ ऐसा करता है तो उसकी शिकायत कर सकते है।

पर्सनल लोन की रिकवरी कैसे होती है?

लोन रिकवरी के लिए बैंक से जुड़े एजेंट होते है। बैंक से लिए गए लोन रकम को उधारकर्ता से रिकवर करते है। यह रिकवरी एजेंट उधारकर्ता के घर और ऑफिस भी पहुंच सकते है। यदि समय पर किस्ते जमा नहीं हो पा रही है तो। अगर किस्ते समय पर जमा हो रही है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है।

जब उधारकर्ता को लोन रकम चुकाने में परेशानी आने लगती है। तो वह लोन की चल रही किस्तों को बैंक में जमा नहीं कर पाता है। तब रिकवरी एजेंट इन उधारकर्ताओं को समय समय पर फ़ोन भी करते है। और फॉर्म में मेंशन एड्रेस पर भी आ सकते है। लेकिन इन एजेंट के द्वारा उधारकर्ता से केवल रिकवरी की बात की जाएगी। किस्तों को समय पर जमा करने की बात की जाएगी लोन चुकाने की बात की जाएगी।

इससे अधिक रिकवरी एजेंट उधारकर्ता से कुछ नहीं कर सकते है। न तो उधारकर्ता को धमका सकते है न ही मार-पीट और न ही इन पर किसी प्रकार का प्रेसर बना सकते है। किसी एजेंट के द्वारा ऐसा किया जाता है। तो उधारकर्ता उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

बैंक का लोन न चुकाने पर क्या होता है?

बहुत सारे लोगो के मन में ऐसे कई प्रश्न रहते है की लोन न जमा करने पर कानूनी कार्यवाई हो होती है। कोर्ट कचेहरी के चक्कर लगाने पड़ते है। लोन न चुकाने पर जेल हो सकती है. ये सब निर्भर करता है बैंक और आवेदक यानि उधारकर्ता पर इन दोनों के बीच कैसा व्यवहार है। इस पर निर्भर करता है।

यदि बैंक और उधारकर्ता के बीच अच्छे ताल्लुकात है तो बैंक पैसे चुकाने के लिए उधारकर्ता को कुछ समय दे सकता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो बैंक उधारकर्ता पर कानूनी कार्यवाई कर सकता है उसके पास लीगल एग्रीमेंट होता है. फिर उधारकर्ता के पास यहा पर कोई विकल्प नहीं रहता है।

पर्सनल लोन नहीं भरा तो क्या होगा?

कोई भी लोन न भरने पर बैंक उधारकर्ता को डिफाल्टर घोषित कर देता है। इसमें कानूनी कार्यवाई के साथ साथ उधारकर्ता की सिविल स्कोर ख़राब हो जाती है जिससे उधारकर्ता को दुबारा लोन लेने में कठिनाई आती है। फिर कोई भी बैंक या नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी भी लोन देने से इंकार कर सकती है। क्योकि सिविल स्कोर ख़राब हो चूका है।

इसलिए आपको उतना ही लोन लेना चाहिए जितना आप आसानी से चूका सकते है। लोन की किस्ते हो या क्रेडिट कार्ड का बिल को समय पर भरे ताकि आपका क्रेडिट स्कोर ख़राब न हो। भविष्य में आपको फिर लोन मिल सके किसी दूसरे बैंक से क्रेडिट कार्ड मिल सके।

उम्मीद करते है कि इस लेख में लिखी गयी जानकारी से आपके प्रश्नो के उत्तर मिले होंगे इसमें हम लोगो ने जाना कि पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा बैंक लोन की रिकवरी कैसे करता है इसके अलावा भी मैंने इस विषय से सम्बंधित अन्य जानकारी मेंशन करने का प्रयास किया है। यदि इस लेख से जुड़ा आपका कोई प्रश्न है तो कमेंट में ज़रूर बताये।

ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पर पहले से कई अन्य आर्टिकल पब्लिश किये जा चुके है। उसे आप पढ़ सकते है यह लेख पसंद आया हो इससे सहायता मिला हो। तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूले। ताकि और लोगो तक यह लेख पहुंच सके।

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